पेट में घुसी 3 फीट लंबी लाठी, साढ़े चार घंटे चला ऑपरेशन; डॉक्टरों ने बचाई 19 वर्षीय छात्र की जान

TIMES7NEWS कानपुर। गिल्ली-डंडा खेलते समय एक 19 वर्षीय छात्र के साथ ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया। खेलते वक्त ऊंचाई से संतुलन बिगड़ने के कारण नीचे गिरे छात्र विशाल के पेट में करीब 7 फीट लंबी लाठी घुस गई और शरीर के अंदर करीब 3 फीट तक पहुंच गई। लाठी पेट के बाईं ओर से घुसकर दाहिनी कांख तक जा पहुंची। हालत इतनी गंभीर थी कि जरा सी चूक छात्र की जान ले सकती थी।

कन्नौज के तिर्वा (तालग्राम) निवासी विशाल को हादसे के बाद परिजन पहले तिर्वा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां से उसे कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट) रेफर किया गया। परिजनों के मुताबिक, आपात स्थिति में इलाज में देरी के चलते वे छात्र को तत्काल कल्याणपुर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।

OT में ले जाना भी बना चुनौती

छात्र के शरीर में घुसी लाठी इतनी लंबी थी कि उसे सीधे ऑपरेशन थिएटर तक ले जाना भी संभव नहीं था। ऐसे में डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से शरीर के बाहर निकले लाठी के हिस्से को ग्राइंडर मशीन से काटकर छोटा किया, ताकि मरीज को ऑपरेशन थिएटर तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।

एक-एक इंच लाठी निकाली, साथ-साथ अंगों की होती रही मरम्मत

वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश यादव और उनकी टीम ने करीब साढ़े चार घंटे तक मैराथन ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने लाठी को एक साथ खींचने के बजाय बेहद सावधानी से एक-एक इंच करके बाहर निकाला। जैसे-जैसे लाठी बाहर आती गई, उसके रास्ते में क्षतिग्रस्त हुए अंदरूनी अंगों की मरम्मत भी साथ-साथ की जाती रही।

डॉक्टरों की सबसे बड़ी चुनौती थी कि लाठी निकालते समय अंदरूनी रक्तस्राव न बढ़े। टीम ने सूझबूझ और तेजी से ऑपरेशन को अंजाम देते हुए छात्र की जान बचा ली।

25 साल बाद सामने आया इतना दुर्लभ मामला

चिकित्सकों के मुताबिक, इस तरह का बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला करीब 25 साल बाद उनके सामने आया है। सफल ऑपरेशन के बाद विशाल अब खतरे से बाहर और स्वस्थ बताया जा रहा है।

गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेल के दौरान हुआ यह हादसा जहां बेहद खौफनाक था, वहीं डॉक्टरों की टीम की सूझबूझ, धैर्य और त्वरित निर्णय ने 19 वर्षीय छात्र को जिंदगी की नई उम्मीद दे दी।

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