लोक संवाद हॉल से नीतीश के निकलने के बाद जेडीयू के सभी विधायक टीवी देखने लगे. कमरे में दो टीवी लगे हुए थे. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर राज भवन से लौटे नीतीश भी पार्टी नेताओं के साथ टीवी देखने लगे. उस वक़्त लालू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस लाइव चल रही थी. जैसे ही लालू ने नीतीश पर हत्या के एक पुराने मुक़दमे का ज़िक्र किया नीतीश के चेहरे के हाव भाव बदलने लगे. उनहोंने किसी को फ़ोन कर वक़ील कृष्णा सिंह को बुलवाया. फिर ललन सिंह और पी के शाही ने मुक़दमे के बारे में बताया और कहा कि लालू के सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं. ये सब नीतीश को बदनाम करने की साज़िश है.
इसी दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी का फ़ोन आ गया. क़रीब 4-5 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई. फिर नीतीश अंदर हॉल में आए और बोले प्रधानमंत्री जी का फ़ोन था, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए बधाई दी है फिर उनहोंने अपने विधायकों से कहा आप सबके लिए भोजन भी बना है, सारा इंतज़ाम है. हम सब साथ खाना खायेंगें” थोड़ी ही देर बाद एक और फ़ोन आया नीतीश कुमार के पास. कुछ देर की बातचीत के बाद उनहोंने बताया कि बीजेपी के विधायक भी यहां आ रहे हैं. मीटींग में मौजूद नेताओं ने तालियों बजाईं.
उधर बीजेपी विधायक दल की बैठक हो चुकी थी. सबने बिना शर्त नीतीश के समर्थन का एलान कर दिया था. विधायक अपने अपने घर जा चुके थे लेकिन सुशील मोदी के यहां से फ़ोन कर सबको नीतीश कुमार के घर पहुंचने को कहा गया.
इधर नीतीश कुमार के घर पर लोक संवाद भवन में कुर्सियां लगाई जाने लगीं कहते हैं उनके यहां उतनी ही कुर्सियां लगती हैं जितने लोग बुलाए जाते हैं. थोड़ी देर बाद बीजेपी के MLA और MLC धीरे धीरे नीतीश के घर पहुंचने लगे. ये सब किसी सपने जैसा है ये कहते हुए सुशील मोदी हॉल में आए. नीतीश ने हाथ पकड़ कर उन्हें अपने बग़ल में बैठाया और फिर बताया गया कि हम सब मिल कर नई सरकार बनायेंगे. 28 जुलाई की शाम पांच बजे शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा. बाद में फैसला लिया गया कि शपथ ग्रहण सवेरे दस बजे होगा. कई विधायक कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि आख़िर ये सब क्या हो रहा है ? सबके मोबाइल फ़ोन ऑफ़ करवा दिए गए थे. हॉल में बैठे विधायकों के चेहरे पर सवाल ही सवाल थे और जवाब सिर्फ़ और सिर्फ़ नीतीश कुमार के पास था