अंधेर नगरी चौपट राजा,बजा रहे सरकारी मुलाजिम सरकार का बाजा।

कानपुर के रजिस्ट्रार महोदय सरकारी चारागाह व नवीन परती जमीन का कर रहे  बैनामा।


सोसाइटी और भू माफियाओं की मिलीभगत से होते खेल।


बूढ़पुर मछरिया की आराजी संख्या 1123 को बाकायदा बैनामे के साथ बेचा गया।


सरकारी पैसा गया कहां किसकी जेब में और क्यों?


उत्तर प्रदेश : कानपुर उपनिबंधक जोन 3 या तो उपनिबंधक पद के काबिल नहीं है या फिर भ्रष्ट सिस्टम की एक कड़ी है, क्योंकि जो जमीन बाकायदा सरकारी अभिलेखों में 1425 फसली वर्ष से 1978 में केडीए को परियोजनाओं के लिए कानपुर नगर निगम द्वारा चारागाह एवं नवीन परती श्रेणी में आवंटित की गई, का बैनामा "प्रयाग सहकारी आवास समिति लिमिटेड"के सचिव अशोक कुमार यादव द्वारा मनोरमा गुप्ता निवासी यशोदा नगर को दिनांक 20 मई 2013 को माननीय उपनिबंधक के द्वारा किया गया। लेखपाल सहित उपनिबंधक तक सबको अच्छी तरह मालूम होगा कि यह जमीन सरकारी है फिर बैनामा किन शर्तों पर और कैसे किया गया?


क्या उस समय की वर्तमान सरकार द्वारा उपनिबंधक जी को वो जमीने बेचने का अधिकार दे दिया गया था ?और उस जमीन से प्राप्त आय का अधिकारी बना दिया गया था। ऐसा नहीं है कि तभी यह खेल चल रहे थे ।2013 का यह मामला है लेकिन सचिवालय द्वारा यदि यशोदा नगर बूढ़पुर में पूरे क्षेत्र की जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने निकलकर आएगी। जिले तालाब,चारागाह, नवीन परती ऊसर सीलिंग जमीनों पर 90 परसेंट खेल हो चुका, अब जब 10 परसेंट बाकी है तो पटाखे फूट गए ।चारों तरफ हल्ला मचा अब होगा क्या? जो 10 पर्सेंट बचा खेल है अब वो रुकेगा या 90 परसेंट जो हो चुका उसमें भी कुछ होगा? अगर एक-एक करके भी दोषियों को सजा दी जाए शायद आधे तो मर खब चुके होंगे। केवल एक आराजी 1123 जिसका क्षेत्रफल लगभग 3 हेक्टेयर के आस पास होगा पूरी बिक चुकी बस चुकी है।

रहा नियम ध्वस्तीकरण का तो केवल 10 साल पुराने ही मकान को गिराया जा सकता है बार-बार खबर चलाने के बावजूद ना तो सरकार के कान में जूं रेंग रही है और ना ही बेखौफ भ्रष्ट आला अधिकारियों के चेहरे पर शिकन दिखाई दे रही है ।आखिर माजरा क्या है सरकार और प्रशासन उसको कोल्हू के दो पाट बन चुके हैं, जिनके बीच में आम जनता पेरी जा रही है। कोई सुनने वाला नहीं क्योंकि सुनने वाले ही कोल्हू के दोनों पाट हैं।

( एडीटर इन चीफ : सुशील निगम)

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