कानपुर विश्वविद्यालय में छात्रों का हंगामा, गेट बंद कर की नारेबाजी

डीसी लॉ कॉलेज के छात्रों ने लगाए भेदभाव और अतिरिक्त शुल्क वसूली के आरोप, कुलपति ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के संकेत

TIMES7NEWS/संवाददाता 

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में बुधवार को डीसी लॉ कॉलेज समेत अन्य लॉ कॉलेजों के छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर हंगामा किया। आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय का मुख्य गेट बंद कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे की सूचना पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा और छात्रों को समझाकर शांत कराया। अधिकारियों से वार्ता के बाद मुख्य द्वार खोला गया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर डीसी लॉ कॉलेज के साथ कथित भेदभाव का आरोप लगाया। छात्रों का कहना था कि अन्य लॉ कॉलेजों में होम सेंटर पर परीक्षा की अनुमति दी जाती है, जबकि उनके संस्थान को इससे वंचित रखा जा रहा है। इसके अलावा छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भेदभाव और अतिरिक्त शुल्क वसूली के आरोप भी लगाए।

प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय का मुख्य गेट बंद रहने से कुछ समय के लिए आवाजाही प्रभावित हुई। विश्वविद्यालय परिसर में आने-जाने वाले छात्रों और अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कुलपति ने भी दिखाए तेवर, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के संकेत

मामले को लेकर कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रवेश प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर गंभीर है।

कुलपति के अनुसार डीसी लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के प्रवेश में मेरिट और आरक्षण नियमों की अनदेखी की शिकायत सामने आई है। मामले की जांच के लिए गठित समिति ने कॉलेज के प्राचार्य से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जांच पूरी होने तक समर्थ पोर्टल पर प्रवेश प्रक्रिया नहीं खोले जाने की बात कही गई है।

कुलपति ने कहा कि नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा केंद्रों में बदलाव किया जाता है। वहीं, मूल्यांकन को लेकर शिकायत मिलने पर आवश्यकता पड़ने पर उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जा सकती है।

उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें एआई तकनीक के साथ विषय विशेषज्ञों की भूमिका रहती है। बीसीआई के 90 दिन के पाठ्यक्रम को लेकर भी विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग विचार कर रहा है।

फिलहाल छात्रों के आरोपों और विश्वविद्यालय प्रशासन के पक्ष के बीच विवाद बना हुआ है। अब निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। 

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