कानपुर में 'सिस्टम' हुआ व्हीलचेयर पर! उपनिबंधक कार्यालय में दिव्यांगों-बुजुर्गों के लिए नहीं लिफ्ट, सरकारी दावों की खुली पोल
करोड़ों का राजस्व देने वाले विभाग में दिव्यांगों के लिए नहीं मूलभूत सुविधाएं, व्हीलचेयर पर बुजुर्ग को सीढ़ियों से ऊपर ले जाने के लिए 5 लोगों ने की मशक्कत
(संवाददाता - संकल्प तिवारी )TIMES7NEWS कानपुर। सरकार जहां सुगम भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और दिव्यांगजन हितैषी व्यवस्थाओं के दावे करती है, वहीं कानपुर के उपनिबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालय की तस्वीर इन दावों की हकीकत सामने ला रही है। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय में आज भी दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कार्यालय की बहुमंजिला इमारत में एक बुजुर्ग व्हीलचेयर पर रजिस्ट्री संबंधी कार्य के लिए पहुंचे, लेकिन ऊपरी मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्हें गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। भवन में न तो लिफ्ट है और न ही ऐसा रैंप, जिससे व्हीलचेयर आसानी से ऊपर जा सके। मजबूरी में परिवार के चार-पांच लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर व्हीलचेयर समेत बुजुर्ग को सीढ़ियों से उठाकर ऊपर पहुंचाया। इस दौरान जरा-सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाल ही में भवन के निर्माण और विकास कार्य होने के बावजूद दिव्यांगों एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए लिफ्ट जैसी आवश्यक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? जब सरकार समावेशी और सुलभ प्रशासन की बात करती है, तब ऐसे सरकारी कार्यालय उन दावों पर सवाल खड़े करते हैं।
सार्वजनिक भवनों में दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रैंप या लिफ्ट जैसी सुविधाओं को आवश्यक माना जाता है। इसके बावजूद कानपुर के इस महत्वपूर्ण कार्यालय में लोग आज भी सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हैं।
यह मामला केवल एक बुजुर्ग की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर कमी को दूर करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी।
